भारतीय साहित्य के अध्ययन की समस्याएं
भारतीय साहित्य की अवधारणा भारत वर्ष की अवधारणा हिमालय और समुद्रों के बीच के भूखंड का सर्वस्वीकृत नाम भारत वर्ष है। बौद्ध ग्रंथों में इस प्रदेश को जम्बूद्वीप कहा गया है। इस भूखण्ड को ‘कुमारी द्वीप’ भी कहा जाता है किन्तु यह नाम साहित्य तक ही सीमित रहा। भरत मुनि की व्युत्पति का उल्लेख प्राचीन साहित्य में कुछ इस प्रकार मिलता है: 1. पुराणों के अनुसार प्रतापी दुष्यन्त के पुत्र भरत ने इस भूखण्ड में चक्रवर्ती राज्य की स्थापना की ओर उन्ही के नाम पर इस द्वीप का नाम भारत वर्ष पड़ा। 2. भारत नाम की दूसरी व्युत्पति का आधार देश में बसने वाला जन है। आर्यों के एक अतिप्राचीन जन का नाम भरत था जो दिल्ली के पास में कुरुक्षेत्र में रहता था।ज्यों–ज्यों भरत जन का विस्तार होता गया यह प्रदेश भरत जनपद कहलाया। ज्यों त्यो भरती प्रजा नामक संज्ञा के अर्थों का भी विस्तार हुआ और सम्पूर्ण द्वीप भारत वर्ष कहलाया। “भरत्येष प्रजाः सर्वास्ततो भरत उच्चते।“ आर्य संस्कृति का प्रतीक अग्नि था। इसी अग्नी को प्राचीन वैदिक साहित्य में “भारत” कहा गय...